फेयरवेल की शाम
पार्टी, डांस, एनजॉय
और खुशी का माहौल
लेकिन बिछुड़ने का दुख
किसी को खोने का दर्द भी
वक्त को
मानो थाम लेना चाहता हो मन
लेकिन कुछ भी
कर पाने में
असमर्थ
वहीं आखिरी पंक्ति में
खड़ा है गुमसुम
खुद में खोया
यहां की हलचलों से
बेखबर
आंखें बेचैन है
जो ढूंढ़ रही है
उस लड़की को
जिसका नाम भी
न पूछ पाया
इन दो वर्षों में...!!!